प्रेतों की दुनिया

 हैलो दोस्तो! आशा करती हूं आप सब कुशल मंगल होगें।

इस दुनिया में हर इंसान कुछ ना कुछ काम करता है कोई १०-५ की नौकरी करता है, कोई बिजनेस करता है।सब परिवार चलाने के लिए कुछ -न-कुछ करते हैं, लेकिन क्या आप सबको पता है कि एक प्रेतों की दुनिया भी होती है। कुछ आधुनिक लोग इस बात को मजाक समझेंगे और कुछ नहीं,सबकी अपनी-अपनी सोच होती है।बचपन से मुझे भूत- प्रेत, चुड़ैल की सच्ची कहानियां सुनने का बड़ा शौक था।जब भी मुझे मौका मिलता तो मैं बुजुर्ग अनुभवी लोगों से कहानी जरुर सुनती थीं। मुझे इस सोशल मीडिया ज्यादा अच्छा माध्यम कोई और नहीं लगा आप लोगों से यह कहानियां साझा करने के लिए।

बात आज से करीब 20-25 साल पहले की है। फाफामऊ जिले की एक चाय की दुकान पर कुछ लोग चाय की चुस्की ले रहे थे। उन्हीं लोगों में से एक शख्स था जिसका नाम रमेश था। रमेश के साथ उसके कुछ दोस्त भी चाय का मजा ले रहे थे। अचानक से उसके एक दोस्त की नजर रमेश के गले में पड़ी एक छोटी सी शीशी पर पड़ी, जिसमें बालू भरा हुआ था। उस दोस्त ने रमेश से पूछा-अरे रमेश! तेरे गले में यह शीशी  कैसी और इसमें यह बालू कैसा क्या भरा हुआ है।

रमेश ने कहा- मैं  बताऊंगा तो तुम लोग विश्वास नहीं करोगे।

दूसरे दोस्त ने कहा क्यों नहीं विश्वास करेंगे तुम बताओ तो

रमेश ने कहा - तुम लोग तो यह जानते हो कि मेरा घर गांव में है और यह उस समय की बात है जब मेरी नौकरी हाईकोर्ट में   नई-नई लगी थी और मैं रात को बस से लौट के वापस पैदल अपने घर तक जा रहा था।मैं हनुमान जी का बहुत बड़ा भक्त हूं इसलिए देर रात बस स्टॉप से अपने घर जाते वक्त मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ करता रहता हूं।उस दिन भी कुछ ऐसा हुआ ।रात के करीब 11:40 के लगभग मेरी बस  स्टॉप पर पहुंची और मैं उतर कर अपने घर की तरफ चल दिया घर जाने का रास्ता करीब आधा किलोमीटर का है और मैं उस बीच हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था घर पहुंचने के कुछ ही कदम पहले मुझे एक जगह नाच गानों का जश्न की आवाज सुनाई देने लगी और मेरा दिमाग उधर चला गया।मैंने सोचा अपना गांव इतना बड़ा तो है नहीं कि किसी के घर में शादी ब्याह पड़े तो हम लोगों को ना बुलाया जाए यही सोचकर मेरे कदम उधर की तरह बढ़ गए कि मैं भी तो देखूं कि गांव में ऐसे कौन सा जश्न हो रहा है कि जिसकी खबर मुझे या मेरे घरवालों को नहीं है।वहां पहुंचकर मैंने देखा कि चारों तरफ बहुत ही ढेर सारे लोग अच्छे अच्छे कपड़ों में थे तो मैंने वहां पर एक बुजुर्ग से पूछा कि बाबा जी यहां पर क्या हो रहा है उस बुजुर्ग ने बड़े ही शालीनता से जवाब दिया कि कल मेरी बेटी की शादी है इसलिए आज हम एक दिन पहले यह जश्न मना रहे हैं।मुझे एक महिला ने एक ग्लास पानी दिया लेकिन उसने वहां पानी का गिलास मेरे हाथ में ना देकर मेरे सामने की मेज पर रख दिया कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि वहां पर जितने भी लोग थे किसी की आंखें नहीं  झपक रही थीं चाहे वह छोटा और बड़ा हो बच्चा बुरा कोई भी हो किसी की भी आंखें नहीं झपक रही थी कुछ देर तक मैं आश्चर्य से देखता रहा और कुछ ज्यादा ध्यान देने पर मैंने देखा कि किसी के भी पलकों के बाल नहीं थे मैंने उसी बुजुर्ग से पूछा कि आप लोगों को बुरा ना लगे तो एक बात पूछूं कि मुझे यह बड़ी अजीब बात लग रही है कि आप लोगों में से किसी की भी आंख में पलकों के बाल नहीं है ।वह बुजुर्ग धीमे से हंसते हुए बोला इसलिए नहीं है क्योंकि  हम प्रेत हैं।यह सुनते ही मेरा दिमाग सन्न रह गया कुछ देर के लिए तो मैं हिल भी नहीं पा रहा था और तभी अचानक से ही उस बुजुर्ग ने दोबारा हंसते हुए कहा कि डरो मत हम तुम्हारा कुछ नहीं करेंगे अभी कुछ देर पहले ही तुमने हनुमान चालीसा पढ़ी है और जो भी हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसके करीब जाने की हिम्मत हम लोगों में नहीं होती। कुछ देर बाद स्थिर होने के बाद मैंने पूछा क्या आप लोगों में भी शादियां होती है ।उस बुजुर्ग ने कहा -हां हम लोगों में भी शादियां होती है ऐसे इंसान जो मरने के बाद मुक्ति नहीं पाते हैं वह प्रेत योनि में आते हैं और प्रेत योनि की में आने के बाद वह अपनी इच्छा से अपना परिवार बनाते हैं।

फिर मैंने पूछा आपकी बेटी की शादी किससे हो रही है ।उस बुजुर्ग ने कहा -कल दोपहर में गंगा नदी के पुल पर एक आदमी की बाइक एक्सीडेंट में मौत हो जाएगी और वह इंसान मुक्ति नहीं पाएगा और उसी से मेरी बेटी की शादी होगी।

यह सुनने के बाद तो मेरा दिमाग ही काम करना बंद कर दिया और मैंने जल्दी से जल्दी वहां से निकल जाने का सोचा और मैं वहां से निकल गया।

अगले दिन रोज की तरह मै फिर ऑफिस गया और रात के करीब 11:40 या 11:45 हो रहे होंगेे।मैं दोबारा हनुमान चालीसा पढ़ते हुए उसी तरह उसी रास्ते से लौट रहा था मैंने देखा कल जहां पर जश्न हो रहा था उसी जगह मातम हो रहा है और बहुत से लोग रो- गा रहे हैं उत्सुकतावश अपने आप मेरे कदम उस ओर बढ़ गए और अचानक से मेरी नजर उसी बुजुर्ग पर पड़ी तो मैंने  उनसे पूछ लिया कि आज तो आपकी बेटी की शादी थी और यहां पर रोना -पीटना मचा हुआ है क्या बात है?

बुजुर्ग ने अपनी नम आंखों को पोछतें हुए कहा-जैसे मैंने बताया था ठीक उसी तरह गंगा के पुल पर वह आदमी जा रहा था और उसका एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौत हो गई लेकिन प्रेत योनि में आने की जगह उसे मुक्ति मिल गई।

मैंने पूछा -लेकिन आप लोगों ने तो कहा था कि वह प्रेत योनि में जाने वाला है।

बुजुर्ग प्रेत ने कहा -हां !वह प्रेत योनि में ही आने वाला था लेकिन जिस वक्त उसका एक्सीडेंट हुआ गलती से गंगा जी का बालू उसके मुंह में चला गया और गंगा जी का पवित्र बालू जिसके भी मुंह में चला जाता है उस इंसान को मुक्ति मिल जाती है वह भूलकर कभी प्रेत योनि में नहीं आता है इसीलिए आज मेरी बेटी की शादी थी और उसकी शादी जिससे होने वाली थी उसे ही मुक्ति मिल गई इसीलिए यहां पर हम लोग मातम मना रहे हैं।

फिर रमेश ने कहा इसीलिए उस दिन के बाद से मैं अपने गले में यह छोटी सी  शीशी और उसमे गंगा जी का बालू हमेशा रखता हूं भगवान ना करे कभी मेरे साथ कोई भी ऐसी दुर्घटना हो तो मैं प्रेत योनि में ना जाऊं मैं मुक्ति को प्राप्त होऊं।

आशा करती हूं कि आप लोगों को मेरी यह कहानी पसंद आई होगी।इसी तरह की और भी रोचक कहानियां मैं आप लोगों के लिए लेकर आती रहूंगी।

                               धन्यवाद।


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